मैं जब तक सफर मे रहा,
तब तक सब कि खबर मे रहा,
और जब मै पा गया मुकाम-ए-
मंजिल तो हर एक के जिक्र मे रहा,
मैं कैसे वया करु अपना दर्द पर अपनो
से बिछड कर बडा हिज्र मे रहा,
कुछ मजबूरीया थी मेरी जो मै तुमको
ऐसे हालातों मे छोडकर गया पर सच
कहू मे बडा फिक्र मे रहा,
कई मेरे अपने मुझे दिलासे पर दिलासे
देते गए मै भी बहुत सब्र मे रहा,
वो कहते थे कि हम तुम्हारी यादों कि
छावं मे रहते थे मने भी कह दिया कि
मे तुम्हारी यादों के शजर मे रहा,
(हेमराजसिंह राजपूत)
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