गजल-चाहत के सब फंसाने झूठे थे,
चाहत के सब फंसाने झूठे थे,
जब उनके हाथों से मेरे हाथ छूटे थे,
मे चाहकर भी उनको थामकर
साथ चल न सका मेरी तकदीर
के सब सितारे मुझसे रूठे थे,
उनको एक अजीब सा नशा
रहता था तीन शब्दों कि दौलत
का इसलिए सब रिश्ते टूटे थे,
कहते है कि आईने सब कुछ
साफ दिखाते है जिसमें हम
दोनो के चेहरे थे वो आईने फूटे थे,
(हेमराजसिंह राजपूत)
चाहत के सब फंसाने झूठे थे,
जब उनके हाथों से मेरे हाथ छूटे थे,
मे चाहकर भी उनको थामकर
साथ चल न सका मेरी तकदीर
के सब सितारे मुझसे रूठे थे,
उनको एक अजीब सा नशा
रहता था तीन शब्दों कि दौलत
का इसलिए सब रिश्ते टूटे थे,
कहते है कि आईने सब कुछ
साफ दिखाते है जिसमें हम
दोनो के चेहरे थे वो आईने फूटे थे,
(हेमराजसिंह राजपूत)
