Saturday, 18 March 2017

Sad love poems

                                ~कविता~              
  तुम कुछ भी कह लो पर तुमको  मुझसे वो प्यार नही  हैं,
आँखों मे वो चमक बार नहीं है वो खुशियों से भरा घर बार नही है,

तुम्हारी बातो मे न अब वो चिंता रही,
जब तुम कहती थी कि तुम बिन न जाने मे कैसै जिंदा रही,

जब तुम पल-पल को कल-कल मे जीती थी,
गम मेरी जुदाई का हरपल भर प्याले पीति थी,

तुम्हारी मिठी सी भारी-भारी बातों मे अब वो भार नही है,
तुम कुछ भी कह लो पर तुमको मुझसे वो प्यार नही हैं,

दिन-दिन भर,आँखों मे आँसू भर,तुम याद मुझे किया करती थी,
जब मुझसे मिलती थी,तो कहती थी,तुम क्या जानो तुम बिन मै कैसै जिया करती थी,

कालेज मे तुम्हारी मेरी चर्चाओ का अब वो सार  नही हैं,
तुम कुछ भी कह लो पर तुमको मुझसे वो प्यार नही हैं,

वे परवाही मे भी जब तुम मेरी परवाह करती थी,
मेरे खातिर सारी दुनिया को रूसवाह करती थी,

महेंदी वाले हाथों मे जब नाम मेरा छुपा होता था,
तुम मुझे दिखाने चली आती थी चाहे सारा घर तुमसे खफा होता था,

इस वक्त मे उस प्यारे वक्त कि अब वो पलट बार नहीं हैं,
तुम कुछ भी कह लो पर तुमको मुझसे वो प्यार नही है,
                      (हेमराज सिंह)

6 comments: