रहे जो याद सदियों तक मै ऐसी रीत बन जाऊँ,
तु मेरी हार बन जाये मै तेरी जीत बन जाऊँ,
जमाना प्रेम ग्रंथों मे हमेशा हमको गाये गा,
बनो तुम प्रेम की पाती तो मै एक गीत बन जाऊँ,
हेमराज
रहे जो याद सदियों तक मै ऐसी रीत बन जाऊँ,
तु मेरी हार बन जाये मै तेरी जीत बन जाऊँ,
जमाना प्रेम ग्रंथों मे हमेशा हमको गाये गा,
बनो तुम प्रेम की पाती तो मै एक गीत बन जाऊँ,
हेमराज
समय के साथ गुजरी वो कहानी छोड आया हूँ,
किसी के पास यादों की निशानी छोड आया हूँ,
कभी मुझको बुलाकर पास सीने से लगाया था
उन्हीं आँखों मे आंसू की रवानी छोड़ आया हूँ
Hemraj Singh Rajput🙏
1222, 1222, 1222, 1222,
न वो इनकार करती है न वो इकरार करती है,
लगा कर टकटकी मुझ पे नजर से वार करती है,
मुझे मालूम है की वो जमाने से झिझकती है,
चुरा कर वो नजर अपनी मेरा दीदार करती है,
हेमराजसिंह
गजल जैसा ही कुछ प्रस्तुत है गजल तो नहीं कह सकता बस एक नजर करे, 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
तुम बिन रहने की आदत डाल रहा हूँ,
मै एक पत्थर मे चाहत डाल रहा हूँ,
इस नामुराद दिल मे तुम्हारे झूठे,
पैगाम की झूठी राहत डाल रहा हूँ,
किसी को देख कर बहुत मचलता है ये दिल,
इसमे थोडी सी शराफत डाल रहा हूँ,
हर रोज सपने मे हदे टूटती है,
मै तो सपनो मे सरहद डाल रहा हूँ,
सुना है तुम जख्म सहने के आदि हो,
लो हेम मै भी आहत डाल रहा हूँ,
हेमराजसिंह राजपूत
में सबकुछ हार बेठा हूँ, तुम्हारी इक बनावट पे,
सभी श्रृंगार फीके हैं तुम्हारी एक सजावट पे,
मेरे घर की हो तुम शोभा,मेरे आँगन की तुलसी
हो सभी त्योहार न्योछावर,तुम्हरी मुस्कुराहट पे,
हेमराजसिंह राजपूत
🙏🏻 गुदगुदाती गजल🙏🏻
अब हमको भी मोहब्बत का इजहार होना चाहिए,
तीर जिगर के उस पार होना चाहिए,
बहुत रह लिए किसी के बिन अकेले-अकेले अब
अपना भी घर संसार होना चाहिए,
हर कोई देख पढ लेता है चेहरा हमारा हमको भी
अब अखबार होना चाहिए,
कि, बस एक नजर मे दिल चुरा लेते है हमको भी
ऐसो से अब खबरदार होना चाहिए,
सुना है, कि वो मोहब्बत मे बडे मकवूल है,यार उनको
तो मोहब्बत का अब इश्तेहार होना चाहिए,
(हेमराजसिंह राजपूत)
सोशल साईट पर ऐसी झूठी हमदर्दी न जताईए,
निर्दोषो कि जान गई है कोई ठोस कदम उठाईए,
बात आप बदला लेने कि करते हो
पहले जरा सैनिको कि बंदूको पर लगे
अंकुशो को हटाईए,
( हेमराजसिंह राजपूत)
अमरनाथ यात्रा मे मारे गए भक्तो को नमन पूर्वक श्राध्दांजली 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻💐💐💐💐
मैं जब तक सफर मे रहा,
तब तक सब कि खबर मे रहा,
और जब मै पा गया मुकाम-ए-
मंजिल तो हर एक के जिक्र मे रहा,
मैं कैसे वया करु अपना दर्द पर अपनो
से बिछड कर बडा हिज्र मे रहा,
कुछ मजबूरीया थी मेरी जो मै तुमको
ऐसे हालातों मे छोडकर गया पर सच
कहू मे बडा फिक्र मे रहा,
कई मेरे अपने मुझे दिलासे पर दिलासे
देते गए मै भी बहुत सब्र मे रहा,
वो कहते थे कि हम तुम्हारी यादों कि
छावं मे रहते थे मने भी कह दिया कि
मे तुम्हारी यादों के शजर मे रहा,
(हेमराजसिंह राजपूत)
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हर रोज दिल शायराना नही होता,
हर किसी से अपना याराना नहीं होता,
हम किसी-किसी को पसंद आते है
हर किसी से दिल का नजराना नहीं होता,
(हेमराजसिंह राजपूत)
आज फिर हमने मन कि मानी,
आँखों ने भी फिर कि बेईमानी,
लोग बातो को दिल पर लगा लेते
है हमने तो बातो पर दिल लगाकर
मानी,
(हेमराजसिंह राजपूत)
गजल-शब्दों को बातों मे रहने दे तो अच्छा है,
शब्दों को बातों मे रहने दे तो अच्छा है,
चाँद को रातों मे रहने दे तो अच्छा है,
बहुत ही धोखे बाज है ये दुनिया तेरे
हाथों को मेरे हाथों मे रहने दे तो
अच्छा है,
तेरे अपनो के रिश्तों से अलग मेरे दिल
का रिश्ता है इसे रिश्ते नातो मे रहने दे
तो अच्छा है,
तेरा प्यार बाँटने का सिलसिला बडा
अजीब सा है ''हेमराज'' इसे तू खैरातो
मे रहने दे तो अच्छा है,
तेरे मेरे गिले-शिकवे के चर्चे गैरो से
क्यों करता है इन्हें मुलकातो मे रहने
दे तो अच्छा है,
ये तेरा बिन मौसम बरसने का अंदाज
रास नहीं आया "हेमराज" इसे तू बरसातो मे रहने दे तो अच्छा है,
(हेमराजसिंह राजपूत)
प्रेम कि राहे साफ होती जा रही है,
हमारी सब गलतियां माफ होती जा रही है,
ये नजरों का धोका है,या धोका नजरों को है
यहाँ मोहब्बते अपने आप होती जा रही है,
जो हमसे कभी खफा-खफा रहते थे आज
उनकी महोब्बते बे-हिसाब होती जा रही है,
मेरी पतंग उस बेबफा के छत पर न उलझे तो
अच्छा होगा पर ये कमवखत हवा खिलाफ
होती जा रही है,
न जाने तुम्हारी आवाज मे क्या जादू है
तुम्हारे गुनगुनाने से मेरी हर गजल लाजवाब
होती जा रही है,
(हेमराजसिंह राजपूत)
कविता-माँ लिखती है खत मे,
माँ लिखती है, खत मे,
कि बेटा दरार आ गई है छत मे,
तेरे जाने से खुशियां चली गई है
आंगन से,
अब तो लौट कर आजा किसी
बहाने से,
रक्षाबंधन पर तेरी बहन थाली
सजाए आस लगाए बैठी रहती है,
मन ही मन तुझे राखी बांधने कि
प्यास लगाए बैठी रहती है,
तेरे पिता अंदर ही अंदर टूट
चुके है,
अब उनकी आँखों से आंसू छूट
चुके है,
तुझको पता नहीं है तेरे पिता ने
अब छडी पकड ली है,
तेरे आने के इंतजार मे उन्होंने
अब घडी पकड ली है,
तेरा भाई तुझ बिन अकेला उदास
रहता है,
लगता जैसे गम कि दुनिया के पास
रहता है,
तेरी दादी की बुढी आँखें सुबहा-
शाम रास्ता तेरा निहारती रहती है,
सोते हुए अक्सर ख्वाबो मे बस
तुझे ही पुकारती रहती है,
गांव के चौपाल मे शाम के वक्त तेरे
दोस्त तेरी ही जिक्र करते है,
न जाने कहाँ होगा कैसा होगा एक-
दुसरे से कर बात तेरी ही फिक्र करते है,
आते-जाते गांव के बडे बुजुर्ग तेरी
खबर-बतर पूंछते रहते है,
जो ज्ञानी विद्वान है वो तेरे जाने
वाले दिन का नक्षत्र पूंछते रहते है,
ऐ-मेरे बेटे जिंदगी के कुछ दिन
ओर बचे है तेरे साथ रहकर काटना
चाहते है,
बहुत रह लिए तुझ बिन अकेले-अकेले
अब साथ रहकर खुशियां वांटना
चाहते है,
खत मिलते ही तू तुरंत निकल आना,
बहन कि राखी को,भाई के अकेले
पन को,पिता की छडी को,दोस्तो कि
फिक्र को,दादी की पुकाइ को कुछ तो
जबाब दे जाना,
मेरा क्या है मै तो हर रोज जीती मरती
हूँ,
जिस दिन से तू गया है उस दिन से
आजतक तेरे वियोग मे मरती रहती
हूँ,
तू लौटकर आए तो हमको जीने कि
चाहा मिल जाए,
तुझ बिन जो भटक चुके है रास्ते वो
राह मिल जाए,
अब मे तुझको क्या-क्या बताऊ सब
कुछ तो तू जानता है,
घर कि हालत तुझसे छुपि नही सब
कुछ तो तू पहचानता है,
मेरा आर्शीवाद सदैव तेरे साथ रहे दिन
दौगुना रात चौकनी हो,
मेरे हिस्से कि खशियां तेरी हो ओर तेरे
हिस्से कि परेशानी चाहे मुझे भोगनी हो,
(हेमराजसिंह राजपूत)