में सबकुछ हार बेठा हूँ, तुम्हारी इक बनावट पे, सभी श्रृंगार फीके हैं तुम्हारी एक सजावट पे, मेरे घर की हो तुम शोभा,मेरे आँगन की तुलसी हो सभी त्योहार न्योछावर,तुम्हरी मुस्कुराहट पे,
हेमराजसिंह राजपूत